Learn Raag Darbari – Online Singing Lessons

क्या आप एक संगीतकार हैं और राग दरबारी के बारे में जानना चाहते हैं ?

राग दरबारी ( raag Darbari or Raga Darbari ) हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत ( Indian classical music ) में सबसे अधिक प्रचलित राग है। इसका नाम दरबार अर्थात शाही अदालत के लिए फ़ारसी से लिया गया है। इसकी मधुरता के कारण इसे रागों का सम्राट और राज दरबार में राजाओं द्वारा सुने जाने की वजह से सम्राटों के राग के रूप में जाना जाता है। एक समय में राज दरबारों में गुजने वाला ये राग धीमा, गंभीर और मीठा होता है जो मन को मोह लेता है। अगर बात बॉलीवुड की की जाए तो सबसे ज़्यादा गाने इसी राग में बने हैं, ये इसके प्रचलित होने का सबसे बड़ा उदहारण हैं।

Details of Raag Darbari In Hindi राग दरबारी के बारे में हिंदी में सीखें

राग दरबारी असावरी थाट से उत्पन्न हुआ है और इसे मध्य रात्रि में गाया जाता है। इस राग की रचना तानसेन ने की थी। इसमें विशेष रूप से आरोह में कोमल ग और कोमल ध पर आंदोलन की आवश्यकता होती है और इस राग में ग ध और नी कोमल लगते हैं शेष सभी स्वर शुद्ध होते हैं। आइये इस राग की विशेषताएं नीचे दिए गए चार्ट के द्वारा समझने की कोशिश करते हैं।

स्वरग ध नी कोमल शेष सभी स्वर शुद्ध
जातीसम्पूर्ण / सम्पूर्ण
थाटअसावरी
वादी / सम्वादीरे / प
समयरात्रि से मध्यरात्रि ( 9 बजे से रात 12 बजे तक )
आरोहसा रे ग म प ध नी सा’ ( ग ध नी कोमल )
अवरोहसा’ ध नी म प म प नी ग म रे सा ( ग ध नी कोमल )
पकड़सा रे ग रे सा ध नी रे सा ( ग ध नी कोमल )
Raag Darbari Notes

ऊपर दिए गए चार्ट से आप को राग दरबारी की विशेषताएं समझ में आ गयी होंगी। इस राग को गाने से आवाज़ में हरकत बढ़ती है और साथ ही साथ रेंज भी क्यूंकि इस राग को आप मंत्र सप्तक से शुरुवात करके माध्यम सप्तक से होते हुए तार सप्तक तक गए सकते हैं। आम तौर पर रात में हमारी आवाज़ खुली हुई होती है इस वजह से इस राग को इस प्रकार बनाया गया है की इसे रात में गाया जाए। प्राचीन काल में ये राग राज दरबारों में गाया जाता था और इसे प्राचीन काल के संगीतकार बड़े ही भाव से राजाओं के समक्ष प्रस्तुत करते थें और उनका मनोरंजन करते थे।

इस राग को गाते समय आपको समय का अहसास नहीं होता है, आप इसके भाव में डूबते चले जाते हैं क्यूंकि सच कहूं तो ये राग हैं ही बड़ा मनमोहक और चुम्बकीय। जैसे जैसे इस राग का रियाज़ बढ़ेगा आपकी आवाज़ की रेंज और हरकत बेहतर होती चली जाएगी। आइये अब एक नज़र डालते हैं इस राग पर आधारित गानों पर ताकि आप इस राग की अदायगी को और भी बेहतर ढंग से समझ सकें।

  1. ओ दुनिया के रखवाले : मोहम्मद रफ़ी द्वारा बैजू बावरा फिल्म में गाया गया ये गाना राग दरबारी का एक बेहतरीन उदहारण है.
  2. झनक झनक तोरी बाजे पायलिया : मन्ना डे द्वारा मेरे हुज़ूर फिल्म के लिए गाया गया ये गाना राग दरबारी की एक सच्ची मिसाल है.
  3. मोरा मन दर्पण कहलाये : आशा भोसले द्वारा गाया गया राग दरबारी पर आधारित काजल फिल्म का ये गाना आज भी आपके मन को मोह लेगा.
  4. दईया रे दईया लाज मोहे लागे : मोहम्मद रफ़ी और लता मंगेशकर द्वारा गाया गया ये गाना राग दरबारी का एक खूबसूरत उदहारण है.

राग दरबारी एक सदाबहार राग है जिसमे हर प्रकार के गाने गाये जा सकते हैं चाहे वो रोमांटिक हो, दर्द भरा गाना हो, देशभक्ति हो या भजन हो सब प्रकार के रस में रंग जाने वाला राग है ये। उम्मीद है आपको हमारे द्वारा दी जाने वाली जानकारी अच्छी लगी होगी। नियमित रूप से नयी जानकारियों के लिए अजनाभ को सब्सक्राइब करें, आपके सहयोग और प्यार के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद्।

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